बग्गा के स्टेचू का कॉन्ट्रैक्ट कैंसिल होने पर भी कम्पनी ने एडवांस वापस देने से किया मना। दोनों ओर से केस करने की तैयारी।
तेजिंदर बग्गा के आमरण अनशन पर बैठ जाने के बाद कुछ लोगों ने एक कंस्ट्रक्शन कंपनी को स्टेचू बनाने का कॉन्ट्रैक्ट दिया था और साथ ही एडवांस भी दे दिया था। पर बग्गा साढ़े तीन दिन में ही अपना अनशन खत्म कर के घर चले गए। अब जैसे ही स्टेचू का प्लान कैंसिल हो गया है तो लोग कंपनी से एडवांस में दिए पैसे वापस मांगने लगे। पर कंपनी ने एडवांस वापस देने से मना कर दिया है। लोग कंपनी पर केस करने की तैयारी कर रहे हैं। उधर कंपनी भी केस करने का मन बना चुकी है।

कुछ दिनों पहले दिल्ली के तेजिंदर बग्गा मध्य प्रदेश के नव निर्वाचित मुख्य मंत्री कमलनाथ पर 1984 के सिख दंगो में शामिल होने का आरोप लगा कर उनके इस्तीफे की मांग ले कर अनशन पर बैठ गए थे। उनके अनशन को ज़्यादा महत्व नही मिला था पर उनके अनशन पर बैठने पर कुछ लोगों ने अपनी जेब से पैसे लगा कर सरदार पटेल की स्टेचू की प्रसिद्धि को देखते हुए सरदार बग्गा का स्टेचू बनाने का प्लान बनाया और कॉन्ट्रैक्ट एक कंस्ट्रक्शन कंपनी को दे दिया।
अब तेजिंदर बग्गा के छोले कुलचे खा कर अनशन समाप्त कर देने से अजीबो गरीब स्तिथि उत्पन्न हो गयी है।
कॉन्ट्रैक्ट देने वाले लोगों को उम्मीद थी कि कांग्रेस तो कमलनाथ को बग्गा जैसे की माँग पर मुख्य मंत्री पद से हटाने से रही और कमलनाथ खुद बग्गा को कोई महत्व देंगे नहीं। ऐसी स्तिथि में बग्गा का ई गोला से जाना लगभग पक्का है। ऐसा हो जाने पर वो लोग जिन्होंने बग्गा से प्रीपेड में टीशर्ट का आर्डर दिया है और टीशर्ट नहीं मिली है वो स्टेचू को गरियाने आते और उनकी एंट्री पर टिकट लगा कर पैसा कमाया जाता।
बग्गा के अनशन से उठ जाने से इन कॉन्ट्रैक्ट देने वाले लोगों का सारा प्लान धरा का धरा रह गया और उल्टे जो पैसे एडवांस के रूप में दे दिए थे उसके भी जाने का खतरा आ गया है। अब यह लोग कंपनी से मांग कर रहे हैं कि वो एडवांस में दिए पैसे वापस कर दे।
वहीं कंपनी ने पैसे वापस करने से साफ इंकार कर दिया है। कंपनी का कहना है इस प्रोजेक्ट में कंपनी इस कॉन्ट्रैक्ट में पहले ही नुकसान की स्तिथि में आ चुकी है।
कंपनी के मुताबिक पूरे देश में बग्गा का स्टेचू बनाने को कोई कारीगर तैयार नही था। तो वे लोग इस स्टेचू को चीन से बनवाने की कोशिश में लग गए पर वहां पर भी जो भी कारीगर ये काम करने को तैयार होता वो बग्गा की तस्वीर देख कर किसी अनजान कारण से बिल्कुल मना कर देता। काफी मनाने के बाद भी वहां कोई तैयार नही हुआ तो हम ये काम दूसरे देशों के कारीगरों के पास ले कर गए।
काफी सारे देशों के कारीगरों ने बग्गा का स्टेचू बनाने से मना कर दिया तब बड़ी मुश्किल से यूगांडा के एक कबीले वाले बग्गा का गोबर का स्टेचू बनाने को तैयार हुए। हमने सोचा उसी पर सिल्वर पेंट लगा कर दे देंगे। पर अनशन समाप्त हो जाने से वो भी नही हो सका।
इस कारीगर को ढूंढने के चक्कर में कंपनी को मिले सारे एडवांस के साथ साथ कंपनी के खुद के कुछ पैसे भी लग गए।
कंपनी सोच रही थी कि बग्गा के अनशन समाप्त करने का तो कोई सवाल ही नही है तो जब फाइनल पेमेंट आएगी तो सारा नुकसान पूरा हो जाएगा।
अब कंपनी का कहना है जब पैसा हमारे पास है ही नहीं तो हम वापस क्यों करें और कंपनी चाहती है कॉन्ट्रैक्ट देने वाले लोग या तो पूरा पेमेंट दे कर स्टेचू ले लें या उनके नुकसान की भरपाई करें।
अब ताज़ा स्तिथि ये है कि दोनों ओर के लोग नुकसान में हैं और दोनों ही चाहते हैं कि अगला उनके नुकसान की भरपाई करे जो कोई नही करना चाहता। अब दोनों ओर के लोग अपने अपने वकीलों से केस करने के लिए सलाह मशवरा कर रहे हैं।
अफवाह ये भी सुनने में आ रही है कि दोनों तरफ के लोग बग्गा पर ही केस कर सकते हैं क्योंकि उसका ही मन छोले कुलचे देख कर ललचा गया नही तो सब कुछ प्लान के अनुसार ही हो रहा था।
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